विचार: संतुलित विदेश नीति का सुफल
श्रीराम चौलिया। संकट में ही वास्तविक चरित्र का परिचय मिलता है। इस संदर्भ में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध एक ताजा पड़ाव बनकर उभरा है। अमेरिका और इजरायल बनाम ईरान युद्ध ने विश्व की सुरक्षा, आर्थिकी और स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। हर देश को इससे उपजी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, पर भारत ने इस संकट में जैसी कूटनीति का प्रदर्शन किया, वह परिपक्व एवं फलदायी साबित हुई है। इसके परिणाम हमारे सामने हैं।
देखा जाए तो पश्चिम एशिया में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासियों का कल्याण और भूराजनीतिक तथा भूआर्थिकी से जुड़े मुद्दे अहम हैं। भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कुल तेल का लगभग 50 प्रतिशत और कुल गैस का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। जब ईरान ने होर्मुज जलमार्ग से तेल एवं गैस ले जाने वाले जहाजों पर हमले शुरू किए, तो नई दिल्ली ने तेहरान के साथ सीधे बातचीत का विकल्प चुना और अपने जहाजों की उस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कराई।